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मानसिक दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ से वंचित बालक (मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक)
मानसिक दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ से वंचित या मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक वे होते हैं, जिनके सीखने की गति धीमी होती है और सीखकर à¤à¥‚ल à¤à¥€ जाते हैं अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ उनमें सà¥à¤®à¤°à¤£ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का अà¤à¤¾à¤µ होता है। à¤à¤¸à¥‡ बालक मानसिक रूप से असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होते हैं, इनमें मौलिकता का अà¤à¤¾à¤µ होता है और नवीन समसà¥à¤¯à¤¾ पर विचार नहीं कर सकते। इनका वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° असमायोजित होता है तथा समाज से पृथकॠरहना चाहते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हताशा à¤à¤µà¤‚ निराशा का अनà¥à¤à¤µ होता है। ये सामानà¥à¤¯ शिकà¥à¤·à¤£ विधियों से शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं कर सकते। इनकी मानसिक आयॠकम होती है अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ अपनी ककà¥à¤·à¤¾ और उससे à¤à¥€ नीचे की ककà¥à¤·à¤¾ का कारà¥à¤¯ ठीक पà¥à¤°à¤•ार से नहीं कर सकते।
इस पà¥à¤°à¤•ार मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ या मानसिक दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ से वंचित बालकों से अà¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¯ उन बालकों से है, जो सामानà¥à¤¯ आयॠतथा सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° के कारà¥à¤¯ को करने में असमरà¥à¤¥ रहते हैं। ये बालक परिवार, विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ तथा समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में समायोजित नहीं हो पाते तथा इनमें हीन à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤ तथा हीन गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¤¾à¤ (Inferiority complex) उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाती हैं। बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ लबà¥à¤§à¤¿ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से 20 से कम बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ लबà¥à¤§à¤¿ (I.Q.) वाले बालकों को मानसिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से पिछड़ा या मानसिक दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ से वंचित माना जाता है। पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में इन बालकों की शिकà¥à¤·à¤¾ की ओर कोई धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं दिया जाता था वरनॠइनकी बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤¹à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ को पूरà¥à¤µ संसà¥à¤•ारों का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ कहकर à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ पर छोड़ दिया जाता था किनà¥à¤¤à¥ इनकी ओर अब धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ गया है और उनका उचित पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ होने लगा है।
पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ देशों में पिछड़ेपन की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ देने में तथा पता लगाने में शारीरिक आयॠ(C.A.), मानसिक आयॠ(M.A.) तथा शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• आयà¥(E.Q.) आदि का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया गया है किनà¥à¤¤à¥ मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के अà¤à¤¾à¤µ में तथा मानसिक आयॠका ठीक-ठीक पता लगाने की असमरà¥à¤¥à¤¤à¤¾ के कारण हम पिछड़ेपन का पता लगाने में इसका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— नहीं कर सकते। अतः à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बालकों के पिछड़ेपन की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ इस पà¥à¤°à¤•ार की गयी है-“मानसिक रूप से मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ या पिछड़ा बालक वह है जो à¤à¤• या अधिक विषयों में बहà¥à¤¤ कम काम कर रहा हो, यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ उसकी आयॠककà¥à¤·à¤¾ की औसत आयॠके लगà¤à¤— बराबर हो।â€
मंदबà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤‚
(1) मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• बरà¥à¤Ÿ (Burt) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°-“पिछड़ा हà¥à¤† बालक वह है, जो शिकà¥à¤·à¤¾ सतà¥à¤° (Session) के मधà¥à¤¯ में अपनी आयॠसà¥à¤¤à¤° की ककà¥à¤·à¤¾ से à¤à¤• दरà¥à¤œà¥‡ नीचे का कारà¥à¤¯ न कर सके अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ मान लिया, à¤à¤• बालक आयॠकी दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से आठरà¥à¤µà¥€ ककà¥à¤·à¤¾ में होना चाहिये। यदि वह बालक आठवीं ककà¥à¤·à¤¾ के मधà¥à¤¯ में सातवीं ककà¥à¤·à¤¾ का कारà¥à¤¯ करने में असफल है तो वह पिछड़ा हà¥à¤† बालक कहा जायेगा। दूसरे दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण से पिछड़ा हà¥à¤† बालक वह है जिसकी शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• लबà¥à¤§à¤¿ 85 या कम हो।â€
(2) कà¥à¤°à¥‹ à¤à¤‚ड कà¥à¤°à¥‹ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°,“ मंदबà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक मूॠहोता है,अतः उसमें सोचने, समà¤à¤¨à¥‡ और विचार करने की शकà¥à¤¤à¤¿ कम होती है। जिस बालक की बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ लबà¥à¤§à¤¿ 70 से कम होती है उसे मंदबà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक कहते हैं ।â€
(3) जी डी पेज के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°,“ मानसिक मंदता सामानà¥à¤¯ या कम विकास की à¤à¤¸à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ है जो बालक में बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ संबंधी कमी या अकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के लिठउतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ होती है ।â€
मंदबà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक के पà¥à¤°à¤•ार / मानसिक अकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के पà¥à¤°à¤•ार / मानसिक मंदता के पà¥à¤°à¤•ार
(1) छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ का ककà¥à¤·à¤¾ के कारà¥à¤¯ के आधार पर
1. सामानà¥à¤¯ पिछड़ापन (General backwardness)-जब कोई छातà¥à¤° पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• विषय में असफल रहता है तो वह सामानà¥à¤¯ रूप से पिछड़ा हà¥à¤† बालक कहा जाता हैं।
2. विशिषà¥à¤Ÿ पिछड़पन (Specific backwardness)-जब छातà¥à¤° पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के किसी à¤à¤• विषय या कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° (Area of knowledge) में पिछड़ा हà¥à¤† है तो वह विशिषà¥à¤Ÿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° या विषय में पिछड़ा हà¥à¤† होता है।
ये à¤à¥€ पà¥à¥‡à¤‚- अधिगम अकà¥à¤·à¤® वाले बालकों की विशेषताà¤à¤‚ / अधिगम अकà¥à¤·à¤® वाले बालकों के पà¥à¤°à¤•ार
(2) सामानà¥à¤¯ वरà¥à¤—ीकरण
(1) मनà¥à¤¦à¤¿à¤¤ मना बालक – ( बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ 70 से कम )
(2) धीमी गति से सीखने वाला बालक ( 70 – 85 बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ )
(3) बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ के आधार पर मंदबà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक के पà¥à¤°à¤•ार
(1) हीन बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक ( 70 – 89 बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ )
(2) मूरà¥à¤– बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक ( 59 – 69 बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ )
(3)मूॠबà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक ( 25 – 49 बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ )
(4) जड़ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बालक ( 0 – 24 बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤²à¤¬à¥à¤§à¤¿ )
मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ या मानसिक रूप से पिछड़े बालकों की विशेषताà¤à¤
मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ या मानसिक रूप से पिछड़े बालकों की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– विशिषà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾à¤à¤ या विशेषताà¤à¤ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं-
(1) बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ परीकà¥à¤·à¤¾à¤“ं के आधार पर पता लगा है कि इन बालकों की बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ बहà¥à¤¤ कमजोर होती है। (2) ये बालक सूकà¥à¤·à¥à¤® विषयों पर विचार नहीं कर पाते। अत: गणित, वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण तथा विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ आदि के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में रà¥à¤šà¤¿ नहीं लेते। (3) परीकà¥à¤·à¤¾ में बार-बार अनà¥à¤¤à¥à¤¤à¥€à¤°à¥à¤£ होते हैं, जिससे आयॠके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° छोटी ककà¥à¤·à¤¾ में ही पढ़ते हैं। (4) अपने संवेगों पर नियनà¥à¤¤à¥à¤°à¤£ नहीं रख पाते। (5) ये बौदà¥à¤§à¤¿à¤• कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ शारीरिक कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में अधिक रà¥à¤šà¤¿ लेते हैं। (6) इनमें आतà¥à¤®-विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ का अà¤à¤¾à¤µ रहता है।
(7) ये सामाजिक कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को करने के योगà¥à¤¯ नहीं होते और अपने को सदैव अयोगà¥à¤¯, निररà¥à¤¥à¤• तथा अपूरà¥à¤£ समà¤à¤¤à¥‡ हैं । (8) यदि इनसे बात करें तो ये कहते कम हैं,सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ अधिक हैं। (9) इन बालकों की संकलà¥à¤ª शकà¥à¤¤à¤¿ अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ निरà¥à¤¬à¤² होती है। अत: ये किसी बात का दृढ़ निशà¥à¤šà¤¯ नहीं कर पाते। (10) ये सीमित à¤à¤µà¤‚ साधारण रà¥à¤šà¤¿à¤¯à¤¾à¤ लिये होते हैं। (11) इनमें मौलिकता का अà¤à¤¾à¤µ होता है तथा ये सामानà¥à¤¯à¥€à¤•रण करने में अयोगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ रखते हैं। (12) इनका अनैतिकता और अपराध की ओर à¤à¥€ à¤à¥à¤•ाव हो जाता है।
मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ के कारण / मानसिक मंदता के कारण
मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ या शैकà¥à¤·à¤¿à¤• पिछड़ेपन के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं-
(1) मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में कमियों के आ जाने से मानसिकदोष आजाता है। मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• कोशिकाओंनको बà¥à¤–ार के कारण, घाव या चोट लगना à¤à¥€ मनà¥à¤¦ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ का कारण है। अनेक और बीमारियाà¤; जैसे-आईटिस, à¤à¤¨à¤¿à¤¸à¤¿à¤«à¤²à¤¾à¤ˆà¤Ÿà¤¿à¤¸, कोन निजिनà¥à¤¥à¤² सिफलिस तथा जरà¥à¤®à¤¨ मीसलस आदि à¤à¥€ मानसिक पिछड़ेपन के लिये उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ हो सकती हैं। इसके अतिरिकà¥à¤¤ à¤à¤ªà¥€à¤²à¥ˆà¤ªà¥à¤¸à¥€ तथा अधरंग à¤à¤ªà¥€à¤ªà¥à¤²à¥ˆà¤ªà¥à¤¸à¥€ आदि बीमारियाठà¤à¥€ इस दोष को जनà¥à¤® देती हैं।
(2) वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ, संवेग तथा अनà¥à¤¯ तथà¥à¤¯à¤¨à¤¬à¤¾à¤²à¤• की निषà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालते हैं। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ से पता चलता है कि कà¥à¤› पिछड़ापन वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥€ दोषों पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है। à¤à¤«à¤°à¤¨ (Aphron) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पढ़ने में पिछड़ापन संवेगातà¥à¤®à¤• दोषों के कारण होता है। कà¥à¤› बालकों में यह छिपा होता है और इसका मनोविशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विधि (Psycho-analytical method) से पता लगाया जा सकता है। à¤à¤«à¤°à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° निषà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿-परीकà¥à¤·à¤£ (Achievement tests) के साथ-साथ अनà¥à¤¯ परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— à¤à¥€ मानसिक अकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के कारणों को पता चलाने के लिये करना चाहिये।
(3) यह विचार सदैव ही लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहा है कि मानसिक पिछड़ेपन का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण वंशानà¥à¤•à¥à¤°à¤® ही है। इस पिछड़ेपन का मà¥à¤–à¥à¤¯ अंश बालकों क। उनके माता-पिता के मानसिक पिछड़ेपन से मिलता है। बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤¹à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ में à¤à¥€ मिलती है और इसका हसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤°à¤£ बालकों में à¤à¥€ हो जाता है। इसका कारण गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ का दोष होता है।
(4) जिन बालकों के घर का वातावरण दोषयà¥à¤•à¥à¤¤ रहता।है, उनमें à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾-गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¤¿ विकसित हो जाती है। पढ़ने में रà¥à¤šà¤¿ न होने के कारण ये बालक पिछड़ जाते हैं। इसका पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण घर में दà¥à¤µà¥‡à¤·, लड़ाई-à¤à¤—ड़े आदि होना है। संवेगों पर नियनà¥à¤¤à¥à¤°à¤£ न कर पाने पर मानसिक सनà¥à¤¤à¥à¤²à¤¨ बिगड़ जाता है और बालक कहीं à¤à¥€ समायोजन नहीं कर पाता।
(5) विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ à¤à¥€ बालकों में पिछड़ेपन को विकसित करने में सहायक होते हैं। इसके पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित पà¥à¤°à¤•ार से हैं-(i) बालकों के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त à¤à¥‡à¤¦à¥‹à¤‚ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ न देना। (ii) जो बालक बीमारी या अनà¥à¤¯ कारणों से विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रहते हैं, वे पिछड़ जाते हैं। अंत: उन पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देकर उनके पिछड़े कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पूरा नहीं कराया जाना । (iii) जब बालकों को रोचक शिकà¥à¤·à¤£ विधि से नहीं पढ़ाया जाता तो वे पाठको नहीं समठपाते और अनà¥à¤¯ बालकों से पीछे रह जाते हैं।
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